अघोरपंथ एवं औघड़-अघोरेश्वर

https://poojashankar30.com/?p=958

ॐ तत्सत् ”समाज में अघोर पंथ को लेकर बहुत सी भ्रांतिया है जिसको दूर करने के लिए अघोर पंथ पर अपना विचार लिख रही हूँ जो आपको सही मार्ग बताएगा की सही मायने में अघोर की सही परिभाषा क्या है। सबसे पहले हम जानेगें की …

गुरु का महत्व, गुरु क्या है? गुरु दीक्षा और गुरु मंत्र का महत्व

jai maa guru

गुरुदेवजी त्वमपाहिमाम् शरणागतम् गुरु का स्थान तो इस संसार में ईश्वर से भी बड़ा होता है जिस प्रकार सूर्य के उदय होने से अंधकार दूर होता है। उसी प्रकार गुरु के वचन मन में फैले अंधकार को नष्ट करते है। उसे ज्ञान की दिव्यता से …

महाशक्ति भगवती की उपासना एवं पूजा कैसे करें?

https://poojashankar30.com/wp-content/uploads/2020/07/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82.jpg

बहुत से लोगों की धारणा होती है कि हम अगर भगवती उस महाशक्ति को सुंदर वस्त्र आभूषण और फल मेवा इत्यादि चढ़ाएंगे तो वह हम पर जरूर प्रसन्न होगी।फल आभूषण मेवा इत्यादि को देखकर कौन नहीं प्रसन्न होता है। परंतु हम किसकी बात कर रहे …

आज के आधुनिक युग में माता पिता अपने बच्चे की परवरिश कैसे करें|

img

एक व्यक्ति का अपने परिवार , पत्नी, बच्चों, माता-पिता, समाज के प्रति और अपने देश के प्रति भी कुछ दायित्व होते है | जिस दिन आप माता पिता बनते है वह दिन आपके जीवन का सबसे सौभाग्यशाली दिन होता है |एक अच्छा माता-पिता बनना हमारे जीवन …

अलौकिक शक्ति क्या है? और शक्ति है कौन ?शक्ति का आदि रूप सर्वेश्वरी हैं। आदि पराशक्ति ही पराप्रकृति मांँ सर्वेश्वरी के स्वरूप है।🙏🏼🙏🏼🌹🌹

जिस अलौकिक शक्ति का हम चिंतन कर रहे हैं वह कोई दूसरी बाहरी वस्तु नहीं है। वह हमारे और आपके बीच का ही है। हम शायद उसके सही रूप को पहचान नहीं पाते हैं, या सही क्या है ?उसकी सही पूजा क्या है, समझ नहीं …

माता का स्नेह।माँ शब्द कि पूर्ण परिभाषा क्या है?

माता-का-स्नेह-https-poojashankar30-com

माता का स्नेह कैसा होता है? जिसे जीवित जागृत अपनी माँ से प्रेम नहीं उसे मंदिर में बैठे पत्थर के देवता और मस्जिद में बैठे शुन्य निराकार ईश्वर से प्रेम नहीं हो सकता। माता का स्नेह कैसा होता है। कितना बड़ा ह्रदय होता है कि …