माता का स्नेह।माँ शब्द कि पूर्ण परिभाषा क्या है?

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माता का स्नेह कैसा होता है?

जिसे जीवित जागृत अपनी माँ से प्रेम नहीं उसे मंदिर में बैठे पत्थर के देवता और मस्जिद में बैठे शुन्य निराकार ईश्वर से प्रेम नहीं हो सकता।

  • माता का स्नेह कैसा होता है। कितना बड़ा ह्रदय होता है कि अपने भी दुख सहकर विपत्ति सहकर,अपने पुत्र -जनों के लिए कितना उपकार की भावना होती है। सबसे सुंदर शब्द है माँ
  • एक माँ हि तो होती है, जो अपने बच्चों को सीने से लगाके अपना दूध पिला कर के और सारी बुरी नजर से बचा कर रखती हैं। माँ क स्थान बहुत उचाँ होता हैं। परमेश्वर की निश्छल भक्ति कअर्थ ही माता का स्नेह है।
  • हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कौन है ? या हम किसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रह चुके हैं? और हमेशा रहेगें।
  • ​यदि सच पूछो कि सबसे सहज क्या है तो मैं कहूँगी कि वह जननी (माँ) ही है। पिता या परिवार तो सर्वाधिक कठोरता के प्रतीक हैं।
  • हमें मातृशक्ति से क्या नहीं मिलता है कितनी खुशी मिलता है कितना स्नेह मिलता है कितना प्यार मिलता है और मातृय शक्ति हमें किस-किस रूप में पत्नी, बहू ,माता , बुआ अनेक नाम रूप से हमारी मदद करती हैं।
  • अनेक नाम रूप से हमारा उत्साह बढ़ाती है। अनेक नाम रूप से वह हममें अच्छे से अच्छे शक्ति की संचालन करती हैं।
  • अपनी जो लौकिक जननी माता है, उनका हृदय महान होता है अपने पुत्रों के बारे में जहां तक महान होता है कि अपने पुत्रों के लिए कितनी तकलीफ सहती होती हैं वो।
  • जीवन की एक महान पूजा है जनमदायनी माता की पूजा, अलौकिक माता का ऋण पारलोकिक माता के ऋण से अधिक समझना।
  • अपने हर इंद्रियों को निग्रहीत कर के, और हर तृष्णा को मारकर गर्भास्य शिशु के लिए अपने बहुत सी वेदनाओं को सहकार उसकी रक्षा करती हैं।
  • और जन्म के बाद उसके लिए खान-पान में सालों तक परहेज रखती हैं जिससे उनके दूध के चलते किसी तरह की परेशानी ना हो। और उसके पश्चात भी पुत्रों के लिए उनमे अपार श्रद्धा होता है। वह श्रद्धा, जो महान श्रद्धा है। उसे कहा नहीं जा सकता़। अघोरेश्वर महाप्रभु

माँ शब्द कि परिभाषा

माँ एक ऐसा शब्द है जिसकी कोई पूर्ण परिभाषा नहीं है अनगिनत कवियों लेखकों विचारकों बुद्धिजीवी संतो महापुरुषों द्वारा एवं समस्त धर्मों में माँ की व्याख्या को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है वास्तविक जीवन में माँ की जो भूमिका है उसे बयान करना असंभव है।

माता का स्नेह और माँ शब्द ही इस जगत का सबसे सुंदर शब्द है। इसमें क्या नहीं है?

वात्सल्य, माया, अपनापन, स्नेह, आकाश के समान विशाल मन, सागर समान अंतःकरण, इन सबका संगम ही है माँ। न जाने कितने कवियों, साहित्यकारों ने माँ के लिए न जाने कितना लिखा होगा। लेकिन माँ और माता का स्नेह की विशालता, अंतःकरण की करुणा मापना आसान नहीं है।

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माँ शब्द कि परिभाषा

दोस्तों आज मैंने माता के बारे में इसलिए यह सब कुछ बातें लिखी है क्योंकि बहुत लोगों ने आजकल अपनी मां को सम्मान देना भूल गये है।


माँ बचपन से लेकर बड़े होने तक यहां तक से कि जब तक वह जिंदा रहती है उसे सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चों की खुशी के अलावा कुछ नजर नहीं आता, चाहे वह किसी की भी मांँ हो चाहे वो एक लड़की की मांँ हो चाहे वह एक लड़की की मांँ हो, माँ सबकी ही होती है।

वह आपको हर दुख से बचाती है, हर कष्ट से बचाती है, हर लोगों से बचाती है चाहे वो आपके पिता की न डाँट ही क्यों ना हो चाहे वह आपका भाई बंधु कोई भी क्यों ना हो उन से बचाती है। माता का स्नेह होता ही ऐसा है।


आजकल लोग परिवार से दूर हो गए हैं किसी को किसी से इतनी लगाओ नहीं रह गई है लोग अपने आप में व्यस्त हैं, अपने आप में मस्त हैं, कोई यह नहीं पूछता कि मांँ तुम क्या खाना खाई हो! मांँ तुम क्या पानी पी हो! मांँ तुम्हारी तबीयत कैसी है ?

लेकिन आजकल लोग सोशल स्टेस मेंटेन करने में व्यस्त हैं।लोगों में अपनी मांँ के प्रति संवेदना कम होती जा रही है।

लोग आजकल अपनी माँ को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं जो जिंदगी भर अपने बेटे का बोझ उठा कर के बड़ा करती है उसके आखिरी समय का बोझ उठाना उन लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।

सही मायने में यह कहा जाऐ तो एक मांँ को कुछ नहीं चाहिए क्योंकि वह सब कुछ अपना देख कर के अपने बच्चों को पाल पोस बड़ा करती है उसे तो सिर्फ सम्मान चाहिए अपने बच्चों की नजर में अपने बहू की नजर में अपने पोते की नजर में। वह तो बस अपने परवरिश पर नाज करना चाहती है कि उसके बेटे ने आज तक उसे एक शब्द नहीं कहा बहुत सम्मान दिया।

माँ के ऊपर मुझे कहानी याद आ रही है जो मैं आपके साथ शेयर करना चाहती हूं ।

एक कि माँ कहानी


एक मां ने अपने बेटे को बड़ी मेहनत से पाल पोस करके बड़ा किया उसे खूब पढ़ाया लिखाया और बहुत बड़ा आदमी बना दिया। उसके बड़े आदमी बनने में उसकी माँ का बहुत बड़ा योगदान था जो उसका बेटा नहीं जानता था क्योंकि उसे क्या पता कि उसकी मां ने किस तकलीफों से पढ़ाया लिखाया है।

उस बड़े आदमी की मां एक दिन मां बीमार पड़ जाती है और उसके देखभाल के लिए एक दाई और दो नर्स रख देता है। ताकि मां को परेशानी ना हो पर माँ की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी डॉक्टर भी समझ नहीं पा रहे थे कि क्या बात है। वो खाना पीना छोड़ रखी थी वह बार-बार यही कह रही थी कि मेरे बेटे को बुलाओ ।

माता जी के बेटे को नर्स ने बताया माताजी ने खाना नहीं खाया है और वह आपको याद कर रही है अगर वो खाना नहीं खाऐगी तो मैं इन्हें दवा कैसे खिलाऊंगी। तब बेटा अपनी मां के पास जाकर के बोला मां तुम्हें पता है ना मैं कितना व्यस्त रहता हूं मुझे कितना काम रहता है तुम खाना क्यों नहीं खा रही हो?

तब उसकी मां ने लढखडाते और कांपते इशारा करते हुए दबी जुबान से बोला, बेटा मुझे तुम्हें देखना था और मैं चाहती हूं कि तुम मेरे पास थोड़ी देर बैठो और मुझसे बातें करो।

लेकिन बेटे ने कहा मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं तुम्हारे पास बैठे रहा हूं मेरे पास बहुत सारा काम है और मैंने तुम्हारे लिए यह नर्स और यह दाई लगा कर तो रखा ही है फिर तुम्हें और क्या चाहिए लड़के ने गुस्से में बोला।

मांँ शांत हो गई अब कुछ नहीं बोली। पर दाई मांँ जो पास खड़े सब कुछ सुन रही थी उससे नहीं रहा गया उसने कहा कि हां बेटा जब तू छोटा था ।

और खाना नहीं खाता था तो तेरी मां तुझे मना कर खाना खिलाती थी और प्यार से पुचकार कर यह भी पूछती थी कि ऐसी क्या बात है जो तुम खाना नहीं खा रहे।

और जब तुम कहते थे कि नहीं तुम मुझे नाच के दिखाओ बंदर की तरह तो मैं खाना खाऊगा, तो तेरी मां नाच नाच के तुझे खाना खिलाती थी। तुम जो कहते थे वह करती थी ।

क्योंकि वह चाहती थी कि किसी तरह से खाना खा लो। यही नही रात रात भर जाकर तुम्हारी देखभाल करना नखरे उठाना, तुम्हारी सलामती के लिए मन्नते मांगना,और इतना कुछ की जो शब्दों में व्यक्त नही हो सकता।

यही तो विडम्बना हैं माँ सब कुछ करती हैं अपने बच्चे के लिए पर जब औलाद की बारी आती हैं तो वो अपनी कमजोर माँ से उँची आवाज में बात कर के उसे और कमजोर बना देती है।

अपनी मांँ को समय दीजिए ,प्यार दिजीऐ और सम्मान दीजिए।

कभी-कभी हम अपनी माता का स्नेह की भावनाओं को नहीं समझ पाते। और यह बडी गलती कर जाते हैं।

कभी भी किसी भी परिस्थिति में और किसी के भी बात में आ करके आप अपनी मांँ का अपमान ना करें आप उनसे प्यार से भी बात कर सकते हैं।

आप जो कह देंगे आपकी मांँ जरूर सुनेगी। क्योंकि मांँ जितना अपने बच्चों से प्यार करती है ।

वह शायद ही किसी से करती हो,उसके लिए आपको कठोर होने की जरूरत ही नहीं है बस एक बार प्यार से बोल कर तो देखिए।

जन्म देने वाली माँ सिर्फ एक बार ही मिलती है और वो होते हैं किस्मत वाले जिनकी माँ होती है।

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(5) Comments

  1. vimlesh singh

    Well Said ..

    1. poojashanker30@gmail.com

      Thank you…

  2. bhawna shankar

    good thoughts that keep you away from negativity

    1. bhawna shankar

      🙏

      1. Gaurav prashant tripathi

        बहुत ही अच्छे और सरल शब्दोँ मे आपने मातृशक्ति को परिभाषित किया है।

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