आज के आधुनिक युग में माता पिता अपने बच्चे की परवरिश कैसे करें|

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एक व्यक्ति का अपने परिवार , पत्नी, बच्चों, माता-पिता, समाज के प्रति और अपने देश के प्रति भी कुछ दायित्व होते है | जिस दिन आप माता पिता बनते है वह दिन आपके जीवन का सबसे सौभाग्यशाली दिन होता है |एक अच्छा माता-पिता बनना हमारे जीवन का सबसे पुरस्कृत व परिपूर्ण कर देने वाला अनुभव होते है|

माता पिता बनने के बाद सबसे बड़ी बात होती है एक अच्छे माता पिता बनने की। चाहें आपके बच्चे जितने भी छोटे हों या बड़े आपका कर्तव्य कभी भी ख़त्म नहीं होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह ही है कि हम आने बच्चों को ऐसी पोषक व सकारात्मक वातावरण प्रदान करें, जिससे उन्हें यह लगे कि वे एक स्वतंत्र, कामयाब, आत्मविश्वासी एवं वत्सल इंसान में विकसित हो सकते हैं। 

आज के आधुनिक युग में बच्चो को समझने जरुरत है,उनसे सख्ती से बर्ताव नहीं करना चाहिए| उनको बहुत ध्यान से और धर्य के साथ समझना चाहिए|माता पिता की भूमिका सबसे जायदा होती है बच्चो के भविष्य को बनने में आपका धर्य और शिक्षा उनकी ज़िन्दगी बदल सकती है |बच्चो से बड़ा धन कुछ भी नहीं यही आपकी सच्ची पूंजी है|

बच्चे की परवरिश क्या है? एक बच्चे की परवरिश करना उसी प्रकार होता है जैसे एक किसान अपने खेत में बीज डालता है |और उससे महीनो तक देखभाल करके उसको एक पौधे के रूप में देख कर बहुत खुश होता है और उसको लगता है कि मेरा मेहनत सफल हो गया मुझे इस मेहनत का जरूर अच्छा फल मिलेगा।

आज के आधुनिक समय में बच्चो की परवरिश कैसे करे, उसके लिए मैंने कुछ सुझाव दिए है जो आपके और आपके बच्चो के बिच आपके रिलेशन को और गहरा करता है |

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माता पिता

अपने बच्चों पर ध्यान दे

इस आधुनिक युग में पैसा और पॉवर की चाह में हर व्यक्ति लगा रहता है |लोग अपने आधुनिक जीवन में इतना ज्यादा व्यस्त हो गए हैं कि वह अपने बच्चों पर उस तरह से ध्यान नहीं दे पाते हैं,जैसे पहले के लोग दिया करते थे आजकल इतनी ज्यादा टेक्नोलॉजी बढ़ गई है लोगों के हाथ में मोबाइल है, लैपटॉप है ।

बच्चे बाहर खेलने नहीं जाते दिन भर फोन पर लगे रहते हैं वह क्या कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे माता-पिता को कुछ पता नहीं रहता है और उसी बीच में बच्चे गलत रास्ते पर चल देते हैं।

इस वजह से बच्चों का फिजिकली विकास नहीं हो पाता क्योंकि वह खेलकूद से वंचित हो जाते हैं वह मोबाइल में गेम खेल कर के और मूवी देख करके छोटी मोटी चीजों से वह मन लगाना सीख जाते हैं। क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें प्रोत्साहित नहीं करते हैं उनकी तरफ ध्यान नहीं देते हैं।

उन्हें सिखाना होगा की क्या अच्छा है और क्या बुरा। साथ ही उनका विकास उत्साहित, स्वस्थ, तथा स्वतंत्र रूप से होना चाहिए।

तो चलिए जानते हैं वो ऐसे कौन से  निर्देश है जिनकी मदद से आप एक अच्छे माता पिता बन सकते हैं ।

1.बच्चों को प्यार देना। Loving and caressing children

प्यार भरा स्पर्श और परवाह से भरा आलिंगन ही काफी है आपके बच्चों को यह बताने के लिए की वास्तव में वे आपके लिए कितने मूल्यवान हैं ।

अपने बच्चों को गले लगाने और प्यार से बातें करने से उनका मन भी शांत होता है और वो माता-पिता की बातों को अच्छे से ध्यान देता हैं।

चाहे आप उनसे कितना ही नाराज़ क्यों ना हों, उन्हें हर दिन यह बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं ।

उन्हें प्यार से गले लगायें और माथे पर किस दें । उन्हें जन्म से ही प्रेम व स्नेह से परिचित व उनका आदि बनाइये । उन्हें यह बताएं कि चाहे कुछ भी हो जाये आपका प्रेम उनके प्रति कभी कम नहीं होगा ।

2. रोज सुबह अपने बच्चे का माथा चूम कर के उसे जगाए। Kiss your child’s forehead every morning and wake him up

अपने बच्चे को इस तरह से भी प्यार जता सकते हैं, रोज सुबह उसे उठाने से पहले उसके माथे पर चुमे और उसे ये अहसास कराएं कि सुबह-सुबह उसका चेहरा देखकर उसे प्यार करना आपको कितना अच्छा लगता है।

आपका यह प्यार से आपने बच्चे का माथा चूमना उसे हमेशा याद दिलाएगा कि मेरी मांँ या मेरे पिता हमेशा मेरे साथ है। वह अपनी आंखें खोले और आपको पाए। उसे होंठो पे प्यार भरी मुस्कान आऐगी।

3.अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से ना करें। Do not compare your children to other children

बच्चों की तुलना दूसरों से करने से बचें, खासकर भाई बहनों को आपस में, बच्चों की तुलना आपस में करने से उनमें आपस में अपने भाई बहनों के प्रति प्रतिद्वंदिता विकसित हो सकती है ।

आप अपने बच्चों के बीच प्रेम सम्बन्ध का पोषण करना चाहेंगे ना कि प्रतियोगिता का ।पक्षपात से बचें । यदि बच्चे आपस में झगड़ रहे हैं, तो किसी एक का पक्ष ना लें, बलकि निष्पक्ष और तठस्थ निर्णय लें।

4. अपने बच्चों के लिए समय निकालें। Make time for your children

अधिकांश माता पिता अपने बच्चों के लिए समय निकाल नहीं पाते हैं क्योंकि वह अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहते हैं ।

लेकिन आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपको अपने बच्चे के लिए समय निकालना है उसको कुछ नया सिखाना है ।अगर उसे कुछ अच्छा बनाना है तो हर दिन कुछ समय अपने बच्चे के लिए स्पेशली ध्यान से उस बच्चे को देना होगा

उस समय पर ध्यान रहे कि आप उस वक्त कोई व्हाट्सएप मैसेज मया फेसबुक ना चेक करें सिर्फ अपने बच्चे पर फोकस करें।

उसकी बातें सुने उसके मन में क्या चल रहा है वह जानने की कोशिश करें सुबह से उसने क्या किया उसे किसने क्या बोला और अपनी छोटी मोटी बातें भी उससे पूछा करें। उसे क्या करना अच्छा लगता है उसे सबसे ज्यादा आज क्या खाना पसंद है।

आपको खुद पता चलेगा कि आपके बच्चों को किस चीज में ज्यादा दिलचस्पी है और वह क्या करना चाहता है।आप ऐसे रोज बात करने से वह आपसे फ्रेंडली रहेगा। और आपको अपने दिल की कोई भी बात बताने में संकोच नहीं करेगा ।क्योंकि उसे पता रहेगा कि मेरे माता पिता मुझसे रोज बात करते है।

बच्चों से दिल खोल कर बात करते हैं और कभी उसके बात को ले करके आप एकदम से रियक्ट ना करे। उसको प्यार से सुने और प्यार से उस बात का जवाब दे सलूशन निकाले और ज्यादातर सलूशन निकालना उसके ऊपर छोड़े फैसला लेना

उस पर छोड़े ताकि वह धीरे-धीरे खुद को स्ट्रांग बनाए और सही फैसला लेने की ताकत उसके अंदर आने लगेगा है।

5.बच्चों की स्टडी का टाइम टेबल फिक्स रखें। Keep Study time table fix for children’s study

बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उसके मानसिक विकास भी होना बहुत आवश्यक है उन्की जानकारी होना बहुत ही आवश्यकता है।

उनके स्कूल में क्या चल रहा है उन्होंने कितनी क्या पढ़ाई की है उनकी स्टडी कैसी चल रही है यह सब का भी ध्यान माता-पिता को रखना पड़ता है ।

आप एक टाइम टेबल बना दे जो फिक्स रहे बच्चे के लिए इस समय पढ़ना है तो पढ़ना है खेलने का समय खत्म हुआ उस समय आप बैठ करके थोड़ा समय दे अपने बच्चे की तरफ फोकस करके उसकी पढ़ाई में उसकी मदद करें।और उनके साथ होम वर्क करें ।

बच्चे क्लास में कैसा परफॉर्म कर रहे हैं यह जानने के लिए स्कूल में रखी जाने वाली पेरेंट्स टीचर मीटिंग्स (PTM) में जाएँ ।आदर्स तौर पर, आपके बच्चों के दिल में आपके नियमों से जितना डर है, उससे अधिक आपके लिए प्यार होना चाहिए ।

6.अपने बच्चों को झूठ बोला ना सीखाऐ। Teach your children not to lie

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अपने बच्चों को झूठ बोला ना सीखाऐ। Teach your children not to lie

बच्चों का मन बहुत कोमल होता है आप अपने बच्चों को कभी भी झूठ बोला ना सीखाऐ चाहे कोई भी वजह हो हमेशा उन्हें सच बोलना सिखाए।

सच बोलने से बच्चों में कॉन्फिडेन्स होते है और वह किसी के सामने बुरे नहीं बनते।

उन्हें कोई भी बात समझाने के लिए अच्छी-अच्छी कहानियों का उदाहरण दें अच्छे-अच्छे कहानियां सुनाएं ताकि उनके मन में वह सब कुछ एक पॉजिटिविटी लाए।

5 वर्ष तक बच्चों को बहुत प्रेम और बहुत ज्यादा दुलार में रखना चाहिए 5 बरस के बाद बच्चों को अनुशासन मे रहना,प्यार करना, सबकी केयर करना सिखाना चाहिए।

16 साल के बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए।

7. बच्चों के साथ हर छोटी छोटी खुशियां सेलिब्रेट करें। Celebrate every little happiness with children

Celebrate every little happiness with children
बच्चों के साथ हर छोटी छोटी खुशियां सेलिब्रेट करें।Celebrate every little happiness with children

छोटी छोटी खुशियां सेलिब्रेट करें जैसा कि मदर्स डे, फादर्स डे, और छोटी मोटी कोई भी ऑकेजन हो आप उसे जरूर सेलिब्रेट करें

उनका दिल रखने के लिए उन्हें खुशी देने के लिए । ताकि उन्हें यह पता चले कि उनके माता पिता आपस में कितना प्यार करते हैं।

अगर आप ये छोटी मोटी खुशियां उनके साथ सेलिब्रेट करेंगे तो उनको इन खुशियों का महत्व समझ में आएगा

और इन फ्यूचर वोअपने बच्चों के साथ यह सब कुछ सेलिब्रेट करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि उनके माता पिता ने यह सारी खुशियां उनके साथ सेलिब्रेट किया तो यह आदत बच्चों को बचपन से ही लगती है।

बच्चों के साथ आप प्लेग्राउंड म्यूजियम या लाइब्रेरी वगैरह जाने की आदत बनाएं महीने में एक बार उन्हें कहीं बाहर घुमाने ले जाए और उन्हें कुछ अच्छा बाहर खिलाने का वादा करें ।जिससे बच्चे हमेशा एक्साइटिड रहेंगे ।

घर पर ही कोई घर का खेल का प्रोग्राम डिसाइड करें और बच्चों को उस में इनवोलभ करें उस तरह से एक्टिविटी कराएं

हफ्ते में एक बार घर के पूरे लोग मिलकर के बच्चों के साथ खूब अच्छी एक्टिविटी करें जिससे बच्चों को यह एहसास हो कि आज हमारी प्ले एक्टिविटी है।

8.बच्चों को प्रोत्साहन दें Encourage your Children

अगर बच्चे गलत करते हैं तो उसे कहानियों के जरिए या अपने एक्सपीरियंस के जरिए उसे समझाऐ एंव बताएं।

अगर आप बच्चों को हमेशा डर और डांटने के साथ बढ़ाएंगे तो, आप कैसे सोच सकते हैं कि वो खुशी और प्रेमपूर्ण के साथ बड़े होंगे।

हमेशा बचपन से ही प्रोत्साहन देना चाहिए उन्हें समझाने का ढंग अलग रखना चाहिए

खुशी और प्रेमपूर्ण वातावरण रखने से बच्चे का विकास अच्छे से होता हैं।

उनसे छोटी मोटी उपलब्धि एवं उनकी स्कूल में अच्छे कार्य के लिए उन्हें शाबाशी और प्रोत्साहन जरूर दें।

उन्हें कभी इग्नोर ना करें उनकी हर बातें ध्यान से सुने।बच्चों को हमेशा प्रोत्साहन देने चाहिए ताकि वो आगे बढ़ें और निडरता के साथ हर चीज का सामना कर सकें। 

9. बच्चों के खाना पीना का ध्यान रखें ।Take care of your children’s diet

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बच्चों के खाना पीना का ध्यान रखें ।Take care of your children’s diet

यह बहुत आवश्यक है कि बच्चे स्वस्थ और पोषक आहार खाएं और साथ ही व्यायाम और खेलकूद में भी भाग लेना चाहिए क्योंकि उनका शरीर स्वस्थ रहता है।

यह कोशिश करें कि उनको बाहर का खाना कम से कम दें और घर पर ही पोषक तत्वों से भरपूर खाना बनाए

और उनके स्वाद के हिसाब से अलग-अलग तरीके का खाना हर दिन बनाकर खिलाए ताकि उन्हें बाहर की चीजें ज्यादा आकर्षित ना करें।

उनके शरीर के विकास के लिए दो समय दूध और रोज फल नाश्ते मे सामिल करे।उनको फल खाने की आदत डाले और स्वयं भी उनके साथ खाऐ ताकि वो आपको देखकर सिखे।

10.अपने बच्चों को शेयरिंग और केयरिंग का महत्व समझाएं।Explain the importance of sharing and caring to your children

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अपने बच्चों को शेयरिंग और केयरिंग का महत्व समझाएं।Explain the importance of sharing and caring to your children

अपने बच्चे को शेयरिंग और केयरिंग का महत्व समझाना चाहिए किसी की भावनाओं को समझना और समझाना।

वह बच्चे बचपन से सीख सकते हैं अगर आप उनके अंदर शेयरिंग और केयरिंग के भावना लाऐ।उन्हें अपने खिलौने, अपने खाने पीने की चीजों को शेयर करना सिखाए ।

बूढ़े लोगों के प्रति आदर का भाव, बड़े लोगों के प्रति सम्मान का भाव तथा छोटे बच्चों के प्रति प्यार का भाव रखना सिखाएं।

बचपन में दी गई इस तरह की शिक्षा बड़े होने पर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना,कॉन्फिडेंस में लाना सिखाता है और दूसरों का दिल जीतना सिखाता है।

11. अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनने की शिक्षा दें।Educate the child to become self-sufficient.

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अपने बच्चों को बताएं की अलग होना कोई बुरी बात नहीं और यह कि हमेशा झुंड के अनुसार चलना भी उचित नहीं है ।

उन्हें सही गलत के बीच का फर्क बचपन से ही बताएं, ताकि वे खुद के फैसले (हमेशा नहीं भी तो अकसर) लेने में सक्षम हो पायेंगे,

बजाय इसके कि हर बात दूसरों से सुनकर उसका पालन करें । जब आपके बच्चे खुद के निर्णय लेने लायक बड़े हो जाएँ, तो उन्हें स्वयं ये चयन करने के लिए प्रोत्साहित करें। 

बच्चा आपसे विपरीत स्वभाव का हो सकता है, उदाहरण स्वरुप अंतर्मुखी होना जबकि आप बहुर्मुखी हैं, इस अवस्था में वे आपके बनाये गए शैली या समझ के लायक नहीं बन पायेंगे और खुद के अनुसार खुद के लिए निर्णय लेना चाहेंगे ।

बच्चों को यह जानना आवश्यक है कि उनके अपने कार्यों के परिणाम (अच्छे या बुरे) उन्हें स्वयं ही भुगतने पड़ते हैं ।ऐसा करने से वे अच्छे निर्णय निर्माता व समस्या निवारक बन पायेंगे जो उन्हें स्वतंत्र और व्यस्क जीवन के लिए तैयार करेगा ।

बच्चों के मित्रों को ना आंकें । इससे आपके बच्चों को यह लगेगा कि आप उनके दोस्तों को नापसंद करते हैं । हमेशा बच्चे के दोस्तों से खुल कर पेश आयें ।अपने बच्चों के सामजिक व्यवहार को भी तराशने की कोशिश करें ।

12. एक अच्छे आदर्श बनिए।Be a good model

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बच्चों को गलती करने पर माफी मांगने की आदत सीखानी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि अगर आप से कोई गलती हो गई हो तो आप भी अपने बच्चों से गलती को स्वीकार करे ,माफी मांगे।

ताकि वो सीखे कि हमें भी माफी मांगनी चाहिए और यह बहुत अच्छी बात है झुकना कोई गलत बात नहीं होती।जो पके हुए फल के पेड़ होते हैं वह सदैव झुके होते हैं और जो अपने आप मे ही इंसान का महत्व भी बढ़ता है।

दूसरों को प्रोत्साहित करने वाला और अपने माता-पिता को बखूबी समझने वाला बनाना चाहिए।बच्चों को कुछ करने का आदेश भले ही ना दें परन्तु उनसे छोटी मोती मदद अवश्य लें । जितनी जल्दी वे आपकी मदद करना सीख जायेंगे, आगे चल कर उतना ही वे तत्पर रहेंगे ।

उन्हें किताब पढ़ने की आदत डलवानी चाहिए ।उन्हें बड़े-बड़े महापुरुषों के बारे में बताना चाहिए।श्रीराम के आदर्शों के बारे में बताना चाहिए बचपन से उन्हें पौराणिक कथाओं को सुनाना चाहिए ताकि अपनी संस्कृति समझ सके ।

13. बच्चों को अपनी जिन्दगी का अनुभव स्वयं लेने दें। Allow children to experience their own life.

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बच्चों को अपनी जिन्दगी का अनुभव स्वयं लेने दें। Allow children to experience their own life.

उनके जीवन का हर फैसला आप ना लें, उन्हें अपने द्वारा किये गए चुनावों के परिणामों के साथ जीवन बिताना आना चाहिए ।आखिरकार तो उन्हें खुद के लिए निर्णय लेना सीखना ही होगा ।

इसीलिए बेहतर होगा कि वो ये कार्य तभी शुरू कर दें जब आप उनका मार्गदर्शन करने हेतु उनके साथ मौजूद हों, ताकि दुष्परिणामों को कम और बच्चों की प्रगति की जा सके ।

बच्चों को यह जानना आवश्यक है कि उनके अपने कार्यों के परिणाम (अच्छे या बुरे) उन्हें स्वयं ही भुगतने पड़ते हैं । ऐसा करने से वे अच्छे निर्णय निर्माता व समस्या निवारक बन पायेंगे जो उन्हें स्वतंत्र और व्यस्क जीवन के लिए तैयार करेगा ।

15.बच्चों को गलतियां करने दें।Let the children make mistakes

बच्चों को अपनी जिंदगी में छोटी मोटी गलतियां करने देनी चाहिए ताकि वह गलती से सीख सकें। जिंदगी बहुत अच्छी शिक्षक होती है। वह बहुत अच्छे से सिखाती है जब तक आप मना करेंगे वह उस चीज को नहीं सीखेगा लेकिन वह अपने परिणाम से जरूर सीख जाएगा। तो अगर वह छोटी मोटी उदाहरण से अगर सीख जाता है तो छोटी मोटी गलतियां करने दे|

जैसे कि अगर कोई चाय का कप रखा है और उसे मना कर रहे हैं मत छुओ उसके बावजूद भी वो छूता है तो ठीक है आप उसे छूने दीजिए। एक बार हाथ जलेगा तो वह कभी भी उस चाय के कप को दोबारा हाथ नहीं लगाएगा यह तो हो गई बचपन की शिक्षा।

बड़े होने की शिक्षा में अगर आपको लगता है कि उसका वह मित्र गलत है और वह उसको कभी भी आघात पहुंचा सकता है ,और वह उस संगत को नही छोड़ा तो आपको उसको बिल्कुल भी उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए |क्योंकि उसको जब तक से आघात नहीं लगेगा वह समझ नहीं पाएगा कि मुझे कैसा मित्र बनाना है।

लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपको आपके बच्चे पर नजर नहीं रखनी है आपको आपके बच्चे पर हमेशा नजर रखनी है ,चाहे वह गलत करें चाहे वह सही करें अगर वह गलत कर रहा है और वह ज्यादा गलत कर रहा है तो उस वक्त आपका बोलना जरूरी है उसे समझाना सही रास्ते पर लाना जरुरी हैं।

16.अपने बच्चों पर अनुचित अपेक्षाओं का भार ना डालें।Do not put the burden of paragraph expectations on your children.

Do not put the burden of paragraph expectations on your children.
अपने बच्चों पर अनुचित अपेक्षाओं का भार ना डालें।Do not put the burden of paragraph expectations on your children.

आपको अपने बच्चों को कक्षा में सर्वप्रथम आने के लिए या किसी खेल में प्रथम आने के लिए मजबूर नहीं करना हैअपितु अच्छा अध्ययन करने वाला और सहस रखने वाला व्यक्ति बनने के लिए प्रेरित करना है । उन्हें अपनी काबिलियत के अनुसार प्रयास करने का अवसर दें ।

आप यह नहीं चाहेंगे की आपके बच्चे आपके उम्मीदों से घबरा कर आपसे दूर हो जाएँ । आपको उनके जीवन में प्रोत्साहन देने वाला बनना है, ना की तानाशाह ।आप अपने बच्चों की इच्छा उन पर छोड़ दें , कि उनके अपने लाइफ में क्या बनने की इच्छा है।

आप अपनी इच्छा उपर ना थोपे कि तुम्हें डॉक्टर ही बनना है या इंजीनियर ही बनना है। ऐसा कहने की बजाय उनकी इच्छा का सम्मान करे और पूछे कि तुम्हारी इच्छा किस फील्ड में है। और ऐ एहसास कराए कि मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं लेकिन तुम्हें अपने जीवन में कामयाब होना देखना है यह तुम्हारे ऊपर है। हर माँ बाप आपने बच्चे को कामयाब देखना चाहते है।

अपने जीवन के उदाहरणों द्वारा अपने बच्चों में आत्मनिरीक्षण को प्रोत्साहित करें ।अपनी चाहतों से प्यार करें परन्तु अपने बच्चों की जरूरतों को सर्वोपरी रखें ।

अपनी महत्वाकांक्षयों के लिए अपने बच्चों को नज़रंदाज़ ना करें । बार बार अपने बचपन पर भी नज़र दौड़ाइए । आपके माता पिता ने जो गलती की है उन्हें दोहराइए मत । इससे वही गलती पीढ़ियों तक चलने से बच जायेगी । हर पीढ़ी के माता पिता/बच्चों को नयी सफलता व नयी गलतियों से सीखना चाहिए ।

सकारात्मक वाक्यों से उनकी प्रशंसा करें जब भी वे कुछ अच्छा करें तो, बजाय उन्हें हमेशा दंड देने के । और कभी भी उन्हें शारीरिक रूप से चोट ना पहूँचायें ।

17.माता पिता का कर्तव्य कभी समाप्त नहीं होता।Parental duty never ends

सिर्फ बच्चों के बड़े हो जाने से माता पिता का कर्तव्य समाप्त नहीं हो जाता । यह भूमिका आपको जीवन भर संभालनी पड़ती है ।

पर याद रखें की बड़े होकर बच्चे जो भी निर्णय लेते हैं वो उनके खुद के होते हैं उनके परिणामों के साथ ।माता पिता की जिम्मेवारी से घबराएं ना ।अपना सर्वोत्तम दें, उनके दोस्त बनकर रहे पर यह कभी ना भूलें कि आप उनके माता पिता हैं, सहयोगी नहीं ।

जैसा कि,आपको ऐसा लग सकता है कि अब आपका अपने बच्चों को जीवन के ढाँचे में डालने का कार्य पूर्ण हो गया पर ऐसा नहीं है । आपका कर्तव्य माँ बाप होने के नाते जीवन भर चलेगा और हर पग पर उन्हें आपके उसी प्यार, दुलार और वात्सल्य की जरुरत पड़ती रहेगी ।

माता पिता जन्म के साथ ही होते हैं कर्म के साथी नहीं होते। तो बच्चों को हमेशा कर्म करना सिखाए ताकि वह अपना जीवन आप के नहीं रहने के बाद भी अच्छे से गुजार सकें।

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(2) Comments

  1. C.B.Pandey

    जय माँ गुरु..🙏🙏💐

  2. Chandra Bhushan Pandey

    ॐ अघोरेश्वराय नमः ..🙏🙏💐

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